आसान नहीं है चंपावत उपचुनाव में कांग्रेस की राह, असंतोष और गुटबाजी से खड़ी हो सकती है मुश्किल

आसान नहीं है चंपावत उपचुनाव में कांग्रेस की राह, असंतोष और गुटबाजी से खड़ी हो सकती है मुश्किल

नैनीताल : उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सत्ता में रहते हुए पुनर्वापसी कर इतिहास रच दिया। पार्टी ने पुष्कर सिंह धामी के चेहरे पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें अपनी ही सीट खटीमा पर कांग्रेस विधायक भुवन चन्द्र कापड़ी से हार का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके भाजपा ने धामी का मान रखा और उन्हें पुन: सत्ता की गद्दी पर बिठाया।

ऐसे में अब धामी को छह माह के अंदर उप चुनाव जीतना होगा। उनके लिए विधायक कैलाश गहतोड़ी ने चंपावत सीट छोड़ दी है। वहीं कांग्रेस के लिए उपचुनाव जीतना बड़ी चुनौती है। क्योंकि विधासभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद पार्टी और संगठन में हुए बदलाव के बाद जैसे हालात उपजे हैं, उसका तोड़ सगठन को निकालना होगा। लेकिन पहले से ही कमजोर और अंरद्वंद्वों से जूझ रही कांग्रेस के लिए चुनौतियां पहाड़ की तरह खड़ी हैं।

वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी

चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी और संगठन में बदलाव किया। लेकिन हार को लेकर जिन बातों को कारण बताया गया उसको लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल काफी आहत नजर आए। उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हार की पूरी जिम्मेदारी पार्टी में गुटबाजी और सिर्फ प्रदेश के नेताओं पर फोड़ना पूरी तरह गलत है। संगठन और पार्टी में बदलाव को लेकर भी पार्टी के कई विधायक खासे नाराज हैं। ऐसे में उपचुनाव के लिए सबको एकजुट करने की बड़ी चुनौती होगी।

भाजपा पहले से बहुमत में

विधानसभा चुनाव में पूर्व धारणाओं को ध्वस्त करते हुए भाजपा ने सत्ता में रहते हुए प्रचंड बहुमत से पुन: वापसी की। ऐसे में प्रदेश भर में अभी जनता के मानस पर भाजपा छाई हुई है। ताजा चुनाव के बाद होने वाले उप चुनावों में ज्यादातर यह देखने के लिए मिलता है कि सत्ताधारी पार्टी परिणामों पर नजर आता है। एेसे में कांग्रेस को अपनी उपचुनाव में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए व्यापक रणनीति बनानी होगी।

तीन चुनाव जीत चुकी है भाजपा

चंपावत सीट पर नजर डालें तो अब तक इस सीट पर दो बार कांग्रेस और तीन बार भाजपा का कब्जा रहा है। इस चुनाव में भाजपा के कैलाश गहतोड़ी ने कांग्रेस प्रत्याशी हेमेश खर्कवाल को इस बार पराजित किया है। ऐसे में कांग्रेस एक बार फिर से हेमेश को मैदान में उतार सकती है। इस सीट पर तकरीबन 85 फीसद वोटर पहाड़ और और 15 फीसद वाेटर मैदान के हैं। यह सीट सीएम धामी की सीट खटीमा से भी लगी हुई है।

पीएम मोदी फैक्टर

मोदी फैक्टर इस चुनाव में भी जमकर चला है। मोदी फैक्टर की आंधी में ही पूर्व सीएम हरीश रावत जैसे दिग्गज लालकुआं सीट पर 16 हजार से अधिक वोटों से पराजित हो चुके हैं। पीएम ने ही धामी पर भरोसा जताते हुए दोबारा सीएम की कुर्सी पर बिठाया। ऐसे में इस सीट पर मोदी फैक्टर भी काम करेगा। चंपावत के लोग भी अपनी सीट से सीएम होने का गौरव हासिल करने की चाह रख सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस इस मुकाबले में पहले से ही कमज़ोर नज़र आ रही है।

क्या कहते हैं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन महारा का चंपावत चुनाव पर कहना है कि कांग्रेस कार्यकर्ता पूरी ताक़त से चुनाव लड़ेंगे। वहीं नेता विपक्ष यशपाल आर्य कहते हैं कि चुनाव में कांग्रेस अपनी हाज़िरी दर्ज कराएगी। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि उप चुनाव को गंभीरता से लें, कांग्रेस संगठन और वरिष्ठ नेता ईमानदारी से काम करें। बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस कोई बड़ा चुनाव नहीं जीत पाई है।

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