पैठाणी (पौड़ी गढ़वाल)। कुछ तस्वीरें केवल किसी इमारत की तस्वीर नहीं होतीं, बल्कि अपने भीतर संघर्षों का इतिहास, बीते दिनों की यादें और अनगिनत सपनों के साकार होने की कहानी समेटे होती हैं। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की पैठाणी के बनास स्थित राजकीय व्यावसायिक महाविद्यालय की तस्वीर भी कुछ ऐसा ही भाव सामने लाती है। अपने क्षेत्र से गुजरते हुए दूर से पूरे महाविद्यालय को मोबाइल में कैद करते डॉ. रावत का यह दृश्य संस्थान की स्थापना से लेकर उसके साकार रूप तक के सफर की याद दिलाता है।
इस तस्वीर को खास बनाता है महाविद्यालय से डॉ. धन सिंह रावत का पुराना जुड़ाव। 3 फरवरी 2019 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महाविद्यालय का शिलान्यास किया था, उस समय भी डॉ. रावत प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री थे। आज भी वे इसी विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। लगभग 26 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस महाविद्यालय का लोकार्पण 7 जनवरी 2022 को डॉ. रावत ने किया था। इस तरह शिलान्यास से लेकर लोकार्पण तक की यात्रा उनके उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए आगे बढ़ी।
एक तस्वीर में दिखाई देता वर्षों का सफर
दूर से पूरे महाविद्यालय की तस्वीर लेते डॉ. रावत का यह दृश्य सहज जरूर है, लेकिन संस्थान के साथ उनके पुराने जुड़ाव के कारण इसका एक विशेष संदर्भ भी है। सामने महाविद्यालय की इमारत और उसे अपने मोबाइल में सहेजते मंत्री—यह दृश्य पहाड़ में शिक्षा के विस्तार और वर्षों पहले शुरू हुई एक पहल के साकार रूप को सामने लाता है।
तस्वीर लेते समय उनके मन में क्या विचार रहे होंगे, यह कहना संभव नहीं है। लेकिन जिस संस्थान के शिलान्यास और लोकार्पण के समय वे उच्च शिक्षा मंत्री थे, आज उसी महाविद्यालय की तस्वीर लेते दिखाई देना इस सफर की एक यादगार झलक जरूर है।
पहाड़ के युवाओं के सपनों से जुड़ा महाविद्यालय
ग्रामीण परिवेश और पहाड़ की कठिन परिस्थितियों को करीब से समझने वाला व्यक्ति जब अपने ही क्षेत्र में शिक्षा के नए अवसरों को आकार लेते देखता है, तो उस अनुभूति को शब्दों में बांधना आसान नहीं होता। विद्यार्थी जीवन में किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, यह व्यक्तिगत अनुभव का विषय है, लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना विकास का ऐसा पक्ष है, जिसका महत्व लंबे समय तक बना रहता है।
पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा के अवसरों तक पहुंचना अनेक विद्यार्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में अपने क्षेत्र में उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होना विद्यार्थियों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है। पैठाणी का यह महाविद्यालय स्थानीय युवाओं को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने की इसी सोच से जुड़ा है।
सफलता की सबसे खूबसूरत परिभाषा शायद यही है—जिन कठिनाइयों से गुजरकर हम आगे बढ़े, आने वाली पीढ़ियों को उन कठिनाइयों से बचाने का प्रयास करें।
वर्ष 2019 में शिलान्यास, वर्ष 2022 में लोकार्पण और आज उसी महाविद्यालय की तस्वीर लेते डॉ. धन सिंह रावत—ये तीनों पड़ाव एक संस्थान की यात्रा को एक साथ जोड़ते हैं।
क्योंकि कुछ तस्वीरें केवल विकास की इमारतें नहीं दिखातीं, वे यह भी याद दिलाती हैं कि उन इमारतों के साथ कितने विद्यार्थियों की उम्मीदें, कितने परिवारों के सपने और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य जुड़ा होता है।
यह तस्वीर केवल एक महाविद्यालय की नहीं, बल्कि अपने पहाड़ में बदलते अवसरों, एक संस्थान के सफर और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदों की कहानी कहती है।

