श्रीनगर में कांग्रेस की बढ़ती मुश्किलें, भाजपा का लगातार बढ़ रहा कुनबा; क्या गणेश गोदियाल को तलाशनी होगी दूसरी सुरक्षित सीट?

श्रीनगर में कांग्रेस की बढ़ती मुश्किलें, भाजपा का लगातार बढ़ रहा कुनबा; क्या गणेश गोदियाल को तलाशनी होगी दूसरी सुरक्षित सीट?

पाबौ और थलीसैंण मंडल में ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों समेत कई लोगों ने थामा भाजपा का दामन; लगातार हो रहे राजनीतिक बदलावों ने श्रीनगर की सियासत को गरमाया

श्रीनगर। श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में इन दिनों लगातार नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के भाजपा में शामिल होने के घटनाक्रम ने क्षेत्र की राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है। पाबौ और थलीसैंण मंडल में ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और अन्य स्थानीय लोगों का भाजपा में शामिल होना इसी बदलते राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा है। एक के बाद एक हो रहे इन घटनाक्रमों से कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है।

श्रीनगर विधानसभा लंबे समय से उत्तराखंड की महत्वपूर्ण राजनीतिक सीटों में गिनी जाती रही है। यहां के राजनीतिक समीकरणों का असर केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गढ़वाल की राजनीति में भी इसकी चर्चा होती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं का दल बदलना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भाजपा में शामिल होने वालों में कई स्थानीय जनप्रतिनिधि

हाल ही में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वालों में ग्राम प्रधान व्यासी देव सिंह, ग्राम प्रधान डुंगरी सुनीता देवी, ग्राम प्रधान मणकोली कविता देवी (वर्चुअल माध्यम से), क्षेत्र पंचायत सदस्य व्यासी विनोद कुमार, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य कफल्ड मोहनलाल, सेवानिवृत्त कैप्टन शिवराज सिंह निवासी खण्डुली, रोशनी देवी एवं सपना कुमारी निवासी खण्डुली, गुलाब सिंह एवं कमलेश निवासी औडली, शिल्पा निवासी बुरांसी तथा सूरज सिंह निवासी पल्ली शामिल हैं।

सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में दुर्गेश कुमार, मंडल महामंत्री खिर्सू अनुसूचित जाति मोर्चा, पूनम टम्टा, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अनुसूचित जाति मोर्चा, रणवीर लाल, मंडल अध्यक्ष थलीसैंण अनुसूचित जाति मोर्चा, दिनेश चंद्र, मंडल अध्यक्ष पाबौ अनुसूचित जाति मोर्चा तथा सुशील कुमार, मंडल महामंत्री थलीसैंण अनुसूचित जाति मोर्चा उपस्थित रहे।

गणेश गोदियाल के सामने भी खड़े हो रहे राजनीतिक सवाल

इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की श्रीनगर विधानसभा को लेकर भविष्य की रणनीति पर भी चर्चाएं होने लगी हैं। गोदियाल श्रीनगर की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं, लेकिन क्षेत्र में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और लगातार हो रही राजनीतिक गतिविधियों के बीच उनके सामने अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती पर चर्चा स्वाभाविक है।

गणेश गोदियाल वर्तमान में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। ऐसे में उन्हें प्रदेशभर में संगठनात्मक गतिविधियों, पार्टी के कार्यक्रमों और आगामी राजनीतिक रणनीति के लिए समय देना पड़ता है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारियां और श्रीनगर विधानसभा में स्थानीय स्तर पर बदलते राजनीतिक समीकरण, दोनों ही उनकी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण पहलू हैं।

राजनीतिक विश्लेषण का एक पक्ष यह भी है कि क्या गोदियाल को भविष्य की चुनावी रणनीति में श्रीनगर के बजाय किसी दूसरी विधानसभा सीट की संभावनाओं पर विचार करना चाहिए? क्या वे श्रीनगर में ही अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाकर संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश करेंगे, या प्रदेशव्यापी जिम्मेदारियों को देखते हुए किसी अन्य सीट को विकल्प के रूप में तलाशेंगे? फिलहाल यह राजनीतिक अटकलों और चर्चाओं का विषय है।

श्रीनगर में भाजपा के विस्तार पर टिकी निगाहें

श्रीनगर विधानसभा में भाजपा लगातार अपने संगठन को गांव और बूथ स्तर तक मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय प्रभाव रखने वाले लोगों का पार्टी से जुड़ना भाजपा के लिए संगठनात्मक विस्तार का अवसर है। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का समय माना जा सकता है कि आखिर स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को पार्टी के साथ बनाए रखने के लिए किस तरह की रणनीति अपनाई जाए।

हालांकि कुछ लोगों के पार्टी बदलने से पूरे विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक जनमत तय नहीं होता, लेकिन ग्रामीण राजनीति में ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों की स्थानीय भूमिका को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का यह संगठनात्मक विस्तार किस दिशा में आगे बढ़ता है और कांग्रेस श्रीनगर में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाती है। साथ ही गणेश गोदियाल की आगामी विधानसभा रणनीति भी क्षेत्र की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बनी रहेगी।

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