उत्तराखंड की हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को आज भी पहली महिला अध्यक्ष का इंतजार है। इसकी एक प्रमुख वजह उत्तराखंड हाई कोर्ट में महिला अधिवक्ताओं की कम संख्या के साथ बार एसोसिएशन की राजनीति में महिला अधिवक्ताओं का कम दखल भी रहा है। ऐसे में देखना दिलचपस्प होगा कि क्या इस साल कोई बड़े पद पर महिला अधिवक्ता की दावेदारी आती है या नहीं।
नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाई कोर्ट में वर्तमान में अब 800 से अधिक पंजीकृत अधिवक्ता हैं। पर इनमें महिला अधिवक्ताओं की संख्या पांच फीसदी भी नहीं है। हाई कोर्ट बार के अनुसार वर्तमान में करीब 40 से 50 महिला अधिवक्ता ही प्रैक्टिस कर रही हैं। ऐसे में बार एसोसिएशन के चुनाव में महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी काफी कम रहती है।
महिला अधिवक्ताओं की कमी के कारण उनसे जुड़े मुद्दे भी कभी बार चुनाव की प्राथमिकता में शामिल नहीं हो पाते। बार की राजनीति में महिला अधिवक्ताओं का दखल भी काफी कम ही रहता है। तीन वर्ष पूर्व बार में महिला अधिवक्ता को शामिल करने के लिए महिला वरिष्ठ अधिवक्ता का पद आरक्षित किया गया था। अब तक तीन महिला अधिवक्ता वरिष्ठ उपाध्यक्ष रह चुकी हैं।
महिलाओं को बराबरी के लिए उन्हें कोर्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर भी देना होगा। वर्तमान बार ने महिला अधिवक्ताओं के लिए मूल भूत सुविधा संपन्न कामन रूम निर्माण कर इसकी शुरुआत कर दी है। युवाओं में काफी महिला अधिवक्ता आ रही हैं। पर महिला अधिवक्ताओं को खुद भी आगे आकर दावेदारी करनी होगी।
अवतार सिंह रावत, अध्यक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन
हाईकोर्ट बार में महिला अध्यक्ष आज तक नहीं बन पाई है। महिला अधिवक्ता होने के नाते हम भी चाहते हैं कि हाईकोर्ट बार में एक बार शीर्ष नेतृत्व में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़े। इसके लिए महिला अधिवक्ताओं को खुद भी आगे आने की जरूरत है।
पुष्पा जोशी, अधिवक्ता
व्यक्तिगत रूप से खुद को सशक्कत मानती हूं। पर बड़े परिपेक्ष्य में देखा जाए तो महिलाएं अब भी भेदभाव का शिकार हैं। उन्हें आगे बढ़ने के लिए पुरुषों के मुकाबले ज्यादा परिश्रम करना पड़ता है। इस बार उपाध्यक्ष पद की दावेदार हूं। भविष्य में अध्यक्ष की दावेदार रहकर महिला अध्यक्ष न होने के मिथक को तोड़ने का प्रयास करुंगी।
प्रभा नैथानी, अधिवक्ता

