तीन दिवसीय दौरे में रेशम उत्पादन, प्रसंस्करण और वस्त्र निर्माण इकाइयों का किया निरीक्षण, दोनों राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर
देहरादून। उत्तराखंड में रेशम उत्पादन से लेकर धागाकरण और वस्त्र निर्माण तक विकसित की गई एकीकृत व्यवस्था अब अन्य राज्यों के लिए भी अध्ययन का विषय बन रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं निदेशक रेशम आनंद कुमार शुक्ला के नेतृत्व में पहुंचे उच्चस्तरीय दल ने उत्तराखंड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन की कार्यप्रणाली, तकनीकी नवाचारों और रेशम उत्पादन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का स्थलीय निरीक्षण किया। तीन दिवसीय अध्ययन दौरे के दौरान दल ने उत्पादन इकाइयों, बुनकर क्लस्टर, प्रसंस्करण केंद्रों और वस्त्र निर्माण इकाइयों का अवलोकन कर उनकी कार्यप्रणाली को समझा।
अध्ययन दौरे के प्रथम दिन दल ने केंद्रीय रेशम बोर्ड एवं आईआईटी रुड़की के संयुक्त प्रयासों से विकसित वातानुकूलित कीटपालन गृह का निरीक्षण किया। यहां अधिकारियों ने आधुनिक तकनीकों के माध्यम से रेशम कीटपालन और उत्पादन प्रक्रिया को बेहतर बनाने के प्रयासों की जानकारी प्राप्त की।

इसके बाद दल ने रामपुर-सहसपुर स्थित बुनकर क्लस्टर का दौरा किया। यहां अधिकारियों ने स्थानीय बुनकरों से संवाद कर रेशम फेडरेशन से जुड़ने के बाद उनकी आजीविका, आय और रोजगार के अवसरों में आए बदलावों की जानकारी ली। बुनकरों ने फेडरेशन से जुड़ने के बाद हुए आर्थिक लाभ और अपने अनुभव साझा किए।
दल ने सेलाकुई स्थित रेशम प्रसंस्करण एवं वस्त्र निर्माण इकाइयों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने कोया बाजार, धागाकरण, ट्विस्टिंग और पावरलूम इकाइयों की कार्यप्रणाली को समझा। साथ ही कच्चे रेशम से धागा तैयार करने और उससे वस्त्र निर्माण तक की संपूर्ण प्रक्रिया का अवलोकन किया।
एकीकृत मूल्य श्रृंखला से किसानों और बुनकरों को मिलेगा लाभ
प्रेमनगर स्थित उत्तराखंड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन के मुख्यालय में आयोजित बैठक में रेशम क्षेत्र की संभावनाओं, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, बुनकरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में उत्तराखंड रेशम फेडरेशन के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ला ने एकीकृत मूल्य श्रृंखला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर रेशम उत्पादन से लेकर धागाकरण और वस्त्र निर्माण तक की सुविधाएं विकसित होने से किसानों एवं बुनकरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रारंभिक चरण में दो क्लस्टरों में इस प्रकार की व्यवस्था विकसित की जाए और उसके परिणामों के आधार पर भविष्य में इसके विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया जाए।
उत्तर प्रदेश के निदेशक रेशम आनंद कुमार शुक्ला ने उत्तराखंड की कार्यप्रणाली और तकनीकी नवाचारों को उपयोगी बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में भी रेशम क्षेत्र के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने उत्तराखंड के अनुभवों और तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ लेते हुए दोनों राज्यों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रेशम क्षेत्र में अंतरराज्यीय सहयोग की नई संभावनाएं
इस अध्ययन दौरे के माध्यम से उत्तराखंड में रेशम उत्पादन, प्रसंस्करण और वस्त्र निर्माण के क्षेत्र में विकसित व्यवस्थाओं को समझने तथा उन्हें अन्य राज्यों में अपनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। स्थानीय उत्पादकों और बुनकरों को बाजार से जोड़ने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने तथा रेशम आधारित रोजगार के अवसरों को मजबूत करने के लिए दोनों राज्यों के बीच तकनीकी सहयोग की संभावनाएं भी सामने आईं।
बैठक में उत्तराखंड की ओर से रेशम फेडरेशन के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ला, सहायक निदेशक विनोद तिवारी, महाप्रबंधक मातबर सिंह कंडारी, रेशम निरीक्षक रोमिल पांडेय, विनोद कुमार, अनिल डोभाल एवं अंकित खाती उपस्थित रहे। वहीं, उत्तर प्रदेश की ओर से सहायक निदेशक सौरभ श्रीवास्तव और दयाशंकर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

